
भगवन श्री राम प्रसाद साहित्य रचना
भगवन श्री राम प्रसाद जी महाराज की मान्यता थी की प्रति भा डि ग्री सेनहीं, अध्ययन स्वाध्याय तथा नि रंतर के अभ्यास सेनि खरती है। सतत्का प्रयास भरा अभ्यास लग्न एवं नि ष्ठा सेप्रति ष्ठा के शि खर प्राप्त करता है। भगवन श्री की स्कूली शि क्षा केवल 6 क्लास पास थी। परंतुसाधत्ुव का वेश धारण करनेके बाद गरुु सेवा, वि नय, नि ष्ठा एवं अभ्यास से14 भाषाओं के प्रकाण्ड पांडि त्य प्राप्त वि द्वान बने। अपनेयगु के न्याय, दर्शनर्श , व्याकरण, भाषा, साहि त्य षडदर्शनर्श , अर्धमर्ध धी पाली, प्राकृत,शौर सनै ी, सस्ं कृत, अग्रं ेजी, फारसी, उर्दू,र्दूसमग्र वि श्व दर्शनर्श ों के तलु नात्मक अध्ययन मेंशीर्ष मणि सतं रतन थे।
वह वाद वि वाद के नहीं, सवं ाद के सतं थे। वेपरस्पर के शास्त्रार्थ का अर्थ,र्थ वि मर्श,र्श भरेवि वेचन सेनि चोड़ नि कालने वाले सतं थे। कुशल प्रवचन कर एवं समग्र वि षयों पर मण्डनात्मक शोध सेवि श्लेषणात्मक लेख लि खनेके पक्षधर थे। क्रि या कांड एवं पाखडं ों को, वेउन्नति प्रधान समाज पर प्रश्न चि न्ह के रूप मेंदेखतेथे। समसामयि क रूढ़ि यां, फैशन के तरीके बदलाव के हामी थे। परुातन परम्पराओंको बि ना वि मर्श के पकड़ कर रखना तथा रूढ़ि को धर्म का रूप देना वि मढुता की पराकष्ठा मानतेथेतथा तरक्की के लि ए रोडा मानतेथे। ऐसे वि चारकों को, वे धर्मगर्म रुु के महंतो के रूप मेंगि नतेथे। वेजड़ता की ग्रथिं थियां मेंलि पटी बद्ुधि को अभ्यास से बहृस्पति के रूप मेंसजानेसवं रनेकी कला मेंकौशल प्राप्त थे। उन्होंनेअपनेपरुुषार्थ भरेसकारात्मक प्रयास से, अनपढ़ों को सस्ं कृत प्राकृत इंग्लि शादी शास्त्र दर्शनर्श वि षयों मेंपारंगत कि या ।
वेमायाराम गण के ब्रह्मा थे। मदन गरुु के कुल के कुलपति थे, तो सदुर्शनर्श गरुु भाई के परि वार के परि ष्कर्ता पज्ू य परुुष थे। वेसयं म एवं तप सेवि कार एवं वि चारों के उच्चश्रखंृ ल भाव को नि यत्रिं त्रित करनेवालेमहातपस्वी सतं थे। उन्होंनेअपनी ऊर्जा सेवि श्व को आलोक सेभरा, अपनी कलम सेभक्ति , रस, गीत, काव्य, गद्यात्मक और पद्यात्मक साहि त्य की रचना की । परंपरागत रूढ़ि यों को दि शा देनेमेंसकारात्मक भमिूमिका नि भाई। वेसयमं और समाज की सोच को, बराबर उन्नत करनेवालेथे। समय प्रभाव मेंआस्था को फि सलानेवालेसतं नहीं थे। उन्होंनेरचा काव्य यंूहै।
- गरुु जीवनी
- इति हास केसदंर्भ
- शोध प्रबधं नों का
- तलु नात्मकअध्ययन
- स्थलू भद्र महाकाव्य
- शालीभद्र महाकाव्य
- स्याद्वाद मजं री भाष्य
- जनै ागमों पर टि प्पणी
- गीता पर प्रवचन
- भक्ति गीत
- सयंम साधना सगं ीत
- रूढ़ियों पर टब्बे
- समसामयि क लेखमाला
- शोध पर्णू र्णलेख
- तलु नात्मक लेख
- प्रवचन मालाए
- स्तोत्र अनवु ाद
- कथा काव्य
- चौपाई छन्द वाद
- व्याकरण वि वेचन इत्यादि